Deled Course 508 Assignment 2 Answer 1 in Hindi

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Deled course 508 Assignment 2 का Answer 1 इसका question मैंने नीचे लिख दिया है आप इसे देख सकते है

इसका उत्तर मैंने 500 शब्दों से अधिक दिया है आप चाहे तो इसे थोडा कम कर के लिख सकते है
Deled Course 508 Assignment 2 Answer 1 in Hindi
प्रश्न : अर्थपूर्ण व सार्थक शारीरिक श्रम के परिप्रेछ्य में कार्य शिक्षा की अवधारणा की व्याख्या कीजिये |
उत्तर: कार्य शिक्षा का एक अभिन्न अंगा है -  शारीरिक शिक्षा | शारीरिक मानसिक एवं शैछिक विकास के अत्यंत आवश्यक है |

उत्तर : कार्य शिक्षा का एक अभिन्न अंगा है -  शारीरिक शिक्षा | शारीरिक मानसिक एवं शैक्षिक विकास के अत्यंत आवश्यक है |

शारीरिक शिक्षा के उद्देश्य 

शैक्षिक अनुभूतियो के परिणामस्वरूप शिक्षा जीवन में परिवर्तन, संशोधन व सामंजस्य पैदा करती है | ये संशोधन कुछ शाध्य की ओर ले जाते है व जब तक उनकी प्राप्ति हेतु प्रयास किया जाता है तो उसे लक्ष्य (Aims) कहते है | कुछ लक्ष्य बहुत आसानी से प्राप्त हो जाते है तथा कुछ के लिए अधिक प्रयत्न करना पड़ता है | लक्ष्य मुख्यतः तीन प्रकार के होते है - (i) लक्ष्य (ii) उद्देश्य (iii) परिणाम 


जिस प्रकार सामान्य शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा का लक्ष्य उन मूल्यों को स्थापित करना है जिनके द्वारा किसी व्यक्ति को शिक्षित किया जाता है ठीक उसी प्रकार शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र ने वे भी मूल्य व्यक्ति को शारीरिक शिक्षा की दृष्टि से शिक्षित बनाते है | यह लक्ष्य ही अंतिम उद्देश्य होता है |

लक्ष्य किसी विचारधारा से प्राप्त होता है इसलिए सिद्धांत तथा नियम विचारधाराओ के उद्गम स्त्रोत है | सिद्धांत तथा नियम अंक सामग्री की व्याख्या पर ही आधारित है | इसके फलस्वरूप लक्ष्य तब तक परिवर्तित नहीं होता, जब तक अंक सामग्री की व्याख्या में परिवर्तन न आ जाये |

लक्ष्य की प्राप्ति हेतु निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति को आवश्यक माना गया है -
  • अच्छा स्वास्थय 
  • शरीर की भौतिक क्रियाओ पर नियंत्रण 
  • चरित्र निर्माण 
  • समय का सदुपयोग 
  • एक अच्छे नागरिक की शिक्षा 
  • परिवार का एक अच्छा सदस्य बनना

सामाजिक विकास से सम्बंधित शारीरिक शिक्षा  के उद्देश्य 

सामाजिक विकास से सम्बंधित शारीरिक शिक्षा के उद्देश्य निम्नलिखित है -
  1. सामाजिक प्रक्रिया में भाग लेने से बालक का सामाजिक विकास होता है | शारीरिक शिक्षा के विद्वानों का मानना है की शारीरिक शिक्षा एक सामाजिक अनुभव है तथा सामाजिक उद्देश्यों का सम्बन्ध वास्तव में उन विधाओ से है जिनके माध्यम से व्यक्ति जीवन तथा समाज में अपने आपको समायोजित करना सीखता है तथा समाज की एक योग्य इकाई बनता है |
  2. शारीरिक शिक्षा कार्यकमो में आत्मसम्मान, प्रेम, मान्यता, सम्बद्धता, स्वीकार्यता जैसी शारीरिक आवश्यकताओ की पूति होती है |
  3. विभिन्न राष्ट्रों, संस्कृतियो तथा भाषाओ से सम्बन्ध रखने वाले खिलाडियो के संपर्क में आकर व्यक्ति अधिक समाजशील बनता है |
  4. खेलो से ही उपलब्धि, प्राप्ति, प्रक्रिया तथा संतोष की अनुभूति होती है |
  5. मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है | सामजिक आवश्यकताओ की पूर्ती से ही व्यक्ति समाज में सुव्य्वस्तिथ होने में सफल होता है |


शारीरिक शिक्षा का महत्व  

शैक्षिक प्रक्रिया में शारीरिक शिक्षा का महतवपूर्ण स्थान है | मस्तिष्क एवं शरीर को पृथक नहीं किया जा एकता है | शरीर के बिना मस्तिष्क को शिक्षित नहीं किया जा सकता है तथा इसी प्रकार मस्तिष्क के बिना शरीर को प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता है |

शारीरक शिक्षा एवं शैक्षिक प्रक्रिया में केवल एक ही अंतर है की शैक्षिक प्रक्रिया में मस्तिष्क की एकाग्रता पर बल दिया जाता है, जबकि शारीरिक शिक्षा में संपूर्ण शरीर का अध्ययन एवं उसके विकास पर बल दिया जाता है | शैक्षिक तथा शारीरिक शिक्षा में संतुलित समन्वय होना चाइये ताकी बच्चो के शरीर व मस्तिष्क दोनों का उचित विकास हो सके |

शारीरिक शिक्षा के कार्यकम

बालक के समुचित विकास के लिए प्रतिदिन कई घंटे शारीरिक क्रिया कलाप कराया जाना आवश्यक है | परन्तु आज के सुसभ्य समाज में बच्चो को विद्यालय में खेलने-कूदने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता | परिणामतः उनका शारीरिक विकास समुचित रूप से नहीं हो पाता |

ऐसी स्थति में विद्यालय का दायित्व है की विद्यालय के दैनिक कार्यक्रम में बच्चो की शारीरिक शिक्षा के उपयुक्त प्राविधान किये जाए ताकि विधालई अवधी में बच्चो में शारीरिक क्रिया-कलाप के प्रति रूचि, उपयुक्त ज्ञान एवं कौशल विकसित किया जा सके |

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