छठ पूजा गीत - मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए

छठ पूजा हिन्दू त्योहारों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है इसे उत्तर भारत में मुख्यतः बिहार और उससे सटे क्षेत्रों जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रध्दा, विश्वास और धूमधाम से मनाया जाता है. छठ पर्व के बारे में एक मान्यता यह भी है कि पृथ्वी पर किसी भी फसल के अंकुरण के लिए तीन मूल तत्व जरूरी हैं- जल, हवा और सूर्य. छठ महापर्व वर्षा ऋतु की फसल अर्थात खरीफ की फसल के बाद और रबी के शुरू होने के पहले कार्तिक मास में मनाया जाता है |  

chhath pooja geet - marbo re sugva dhanukh se, suga gire murjhaaye

इस त्योहार में वर्षा ऋतु की स्थानीय फसल जैसे मूली, ओल, हल्दी, ऊँख, केला, सुथनी, जलीय सिंघाड़ा आदि ईश्वर को अर्पित करते हुए उन्हें धन्यवाद देते हैं. आजकल लोग सेब, नारियल इत्यादि भी पूजा में चढ़ाने लगे हैं जो स्थानीय अर्थात उत्तर और पूर्वी भारत में नहीं उपजती हैं, अतः पहले नहीं चढ़ाया जाता था. भगवान सूर्य को पिसे चावल, चीनी, घी से बनी मिठाई भी चढ़ाई जाती है |  

इन सभी वस्तुओं को भगवान् को अर्पित करते हुए उन्हें ये सब प्रदान करने के लिए धन्यवाद करते हैं. छठ पूजा के साथ ही गेंहू की बुवाई करना भी शुरू हो जाती हैं. इसके साथ ही भगवान् से प्रार्थना की जाती है कि हमें आगे गेहूं, तेल, दाल की फसल इत्यादि भरपूर देना ताकि हमारी और हमारे परिवार, समाज का साल भर भरण-पोषण हो सके. उगते सूर्य की पूजा के साथ-साथ याचना करते हैं कि हम अब जो रबी फसल जैसे- गेहूं, सरसों, तिलहन, दलहन आदि बोएंगे, उसे प्रचुर मात्रा में उपजा दें ताकि हमारे परिवार का आगे भी भरण-पोषण हो सके |


छठ पूजा गीत - Marbo Sudhva Dhanukh Se Lyrics in Hindi

नारियल जे फरेला खवद से,

नारियल जे फरेला खवद से,


ओह पर सुगा मेड़राए,

ओह पर सुगा मेड़राए ||


ऊ जे ख़बरी जनैबो अदित से

सुगा दिहली जुठियाय,

सुगा दिहली जुठियाय ||


ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से

सुगा गिरे मुरझाए,

सुगा गिरे मुरझाए ||


ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से

ओह पर सुगा मेड़राए,

ओह पर सुगा मेड़राए ||

 

ऊ जे ख़बरी जनैबो अदित से

सुगा दिहली जुठियाय,

सुगा दिहली जुठियाय ||


ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से

सुगा गिरे मुरझाए,

सुगा गिरे मुरझाए ||


अमरुदवा जे फरेला खवद से

ओह पर सुगा मेड़राए,

ओह पर सुगा मेड़राए ||


ऊ जे ख़बरी जनैबो अदित से

सुगा दिहली जुठियाय,

सुगा दिहली जुठियाय ||


ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से

सुगा गिरे मुरझाए,

सुगा गिरे मुरझाए ||


ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से

ओह पर सुगा मेड़राए,

ओह पर सुगा मेड़राए ||


ऊ जे ख़बरी जनैबो अदित से

सुगा दिहली जुठियाय,

सुगा दिहली जुठियाय ||


ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुष से

सुगा गिरे मुरझाए,

सुगा गिरे मुरझाए ||


सभे फलवा जे फरेला खवद से

ओह पर सुगा मेड़राए,

ओह पर सुगा मेड़राए ||


ऊ जे ख़बरी जनैबो अदित से

सुगा दिहली जुठियाय,

सुगा दिहली जुठियाय ||


ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुष से

सुगा गिरे मुरझाए,

सुगा गिरे मुरझाए ||


ऊ जे सुगनी जे रोवेली वियोग से,

आदित होई ना सहाय -2

देव होई ना सहाय,

आदित होई ना सहाय,

देव होई ना सहाय ||

इसे भी देखे: